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14 April 2026

“यादों के समय दृश्य बार-बार फॉरवार्ड रिवर्स होने लगते हैं और बहुत तेज़ी से भीतर कहीं भंवर सी उमेठ उठाती है और वमन की तरह कुछ पंक्तियां कागज पर पसर जाती हैं, तब जाकर चि...

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14 April 2026

अच्छा संस्मरण वह है, जो आपको भीतर तक उद्वेलित करे। इस मायने में युवा लेखक यतीश कुमार की किताब ‘बोरसी भर आँच : अतीत का सैरबीन’ वाकई लाजवाब है। इस पुस्तक का हर चैप्टर जा...

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14 April 2026

‘धान देस के मल्हार’ शीर्षक सुनते ही लगा मानो धरती माँ अपनी राग में कुहुक उठेंगी। शुरुआती कुछ पन्नों से ही धान की सोंधी ख़ुशबू मेरे साथी बन गए और अंत तक मैं इसकी सुगंध...

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14 April 2026

'पूँटी’ माने बंगाल की पोठी मछली! यतीश कुमार उपन्यास के शुरुआती पन्ने से ही 'समय’ अपनी हाज़िरी लगाता मिला। उसकी उपस्थिति में समस्याएँ भी पंक्ति दर पंक्ति दर्ज ह...

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26 December 2024

एक मात्र `भात’ शब्द से दर्शन संसार भर का एक ही कविता में समेटना एक विलक्षण कृत है इस पहली कविता से आप एक नये घर में प्रवेश करते हैं जिस घर का दरवाज़ा खुले आकाश में खुल...

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26 December 2024

निशीथ और त्रियामा के बीच गुजरती क़ज़ा के रूप में कोरोना की दहशत भरी रातें। रात का कड़वा सच! समाज का सच, मीडिया का सच, रिश्तों का सच और इस सच के बीच करुणा, समाज सेवा और...

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